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नवरात्रि कब से शुरू है 2026? जानिए सही तारीख, कलश स्थापना और शुभ समय

नवरात्रि कब से स्टार्ट हैं? अगर आपके मन में भी यही सवाल है, तो इस साल यानी 2026 की शारदीय नवरात्रि को लेकर आपको तारीख और तिथि को लेकर थोड़ा confusion हो सकता है। खासकर इसलिए क्योंकि प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर से शुरू होकर 11 अक्टूबर तक रहेगी। लेकिन पंचांग के अनुसार शारदीय नवरात्रि का पहला दिन रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को माना जाएगा। इसी दिन से नवरात्रि के नौ दिनों की शुरुआत होगी और मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।
नवरात्रि 2026 कब से शुरू है?
शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी। Drik Panchang के अनुसार 2026 में Navratri Day 1 11 अक्टूबर को है और इस दिन प्रतिपदा तिथि के साथ घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है।
प्रतिपदा तिथि का समय इस प्रकार है:
प्रतिपदा तिथि शुरू: 10 अक्टूबर 2026, सुबह 11:49 बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 11 अक्टूबर 2026, दोपहर 12:00 बजे
इसलिए अगर आप Google पर “Navratri kab se start hai 2026”, “नवरात्रि कब से शुरू है” या “Navratri 2026 date” search कर रहे हैं, तो सीधा जवाब है — 11 अक्टूबर 2026 से।
10 अक्टूबर से नहीं, 11 अक्टूबर से क्यों?
यह सवाल काफी लोगों के मन में आ सकता है क्योंकि प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर को 11:49 AM से शुरू हो रही है। यहां एक बात समझना जरूरी है कि हिंदू पंचांग में किसी त्योहार की तारीख केवल तिथि के शुरू होने के समय से तय नहीं होती। त्योहार की गणना में सूर्योदय और उस दिन prevailing तिथि को भी देखा जाता है।
2026 में प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर को शुरू होकर 11 अक्टूबर दोपहर तक रहेगी। 11 अक्टूबर के सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि मौजूद होने के कारण Navratri Day 1 और Ghatasthapana 11 अक्टूबर को होगी। Drik Panchang के 2026 calendar में भी 11 अक्टूबर को Navratri Day 1 और Pratipada दर्शाई गई है। यही कारण है कि 10 अक्टूबर को प्रतिपदा शुरू होने के बावजूद नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर माना जाएगा।
नवरात्रि 2026 में घटस्थापना कब होगी?
नवरात्रि के पहले दिन सबसे महत्वपूर्ण पूजा में से एक होती है घटस्थापना या कलश स्थापना। इसे मां दुर्गा के नौ दिनों के पूजन की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस दिन घर के पूजा स्थान पर विधि-विधान से कलश स्थापित किया जाता है और मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है।
ध्यान रखें कि घटस्थापना का exact Muhurat location के हिसाब से बदल सकता है, क्योंकि इसके लिए सूर्योदय, स्थानीय समय और पंचांग की अन्य गणनाओं को ध्यान में रखा जाता है। इसलिए अपने शहर के अनुसार घटस्थापना मुहूर्त देखना बेहतर रहता है। Drik Panchang भी अलग-अलग locations के लिए अलग मुहूर्त calculate करता है।
नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है?
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री को मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति को शक्ति, स्थिरता और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
अगर आप नवरात्रि के दौरान पूजा करते हैं तो पहले दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें, पूजा स्थान को साफ करें और श्रद्धा के साथ मां शैलपुत्री की पूजा करें। यहां सबसे जरूरी चीज महंगे पूजा सामान से ज्यादा श्रद्धा और सही विधि है।
2026 में नवरात्रि के नौ दिन कब-कब हैं?
2026 में नवरात्रि का पहला दिन 11 अक्टूबर को है। इसके बाद 12 अक्टूबर को द्वितीया, 13 अक्टूबर को तृतीया और 14 अक्टूबर को चतुर्थी रहेगी। इसके बाद 15 अक्टूबर को पंचमी, 16 अक्टूबर को षष्ठी, 17 अक्टूबर को सप्तमी, 18 अक्टूबर को अष्टमी और 19 अक्टूबर को नवमी रहेगी।
20 अक्टूबर को नवमी से जुड़े अनुष्ठान और Navratri Parana आदि देखे जाते हैं, जबकि 21 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी है। इस तरह 2026 की शारदीय नवरात्रि का मुख्य पर्व 11 अक्टूबर से शुरू होकर 19 अक्टूबर तक नौ दिनों के क्रम में चलता है और इसके बाद विजयादशमी का पर्व आता है।
नवरात्रि में Rudraksha पहनना शुभ है?
नवरात्रि को मां दुर्गा और शक्ति की साधना का विशेष समय माना जाता है। ऐसे समय में बहुत से लोग मंत्र जाप, ध्यान, पूजा और आध्यात्मिक साधना करते हैं। इसी वजह से कई लोग नवरात्रि के दौरान Rudraksha धारण करने में भी रुचि रखते हैं। रुद्राक्ष को परंपरागत रूप से भगवान शिव से जुड़ा हुआ माना जाता है।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति के लिए एक ही Rudraksha सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। अगर आप अपनी राशि, जन्म कुंडली या ग्रह स्थिति के अनुसार रुद्राक्ष पहनना चाहते हैं, तो केवल इंटरनेट पर देखकर कोई भी Rudraksha खरीदने के बजाय अपनी आवश्यकता और जानकार ज्योतिषीय सलाह को ध्यान में रखना बेहतर होता है।
उदाहरण के लिए अलग-अलग Mukhi Rudraksha को भारतीय ज्योतिष और आध्यात्मिक परंपरा में अलग-अलग ग्रहों और ऊर्जाओं से जोड़ा जाता है। इसलिए Rudraksha चुनते समय सिर्फ “कौन सा सबसे powerful है” के बजाय यह देखना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आपके लिए कौन सा Rudraksha उपयुक्त माना जाता है।
नवरात्रि में क्या करना चाहिए?
नवरात्रि सिर्फ गरबा और डांडिया का festival नहीं है। यह हमारे लिए अपनी daily life को थोड़ा slow करने, पूजा-पाठ करने और अपने मन को शांत करने का भी समय है। अगर आप घर पर नवरात्रि की पूजा कर रहे हैं तो रोज सुबह पूजा स्थान की सफाई करें। मां दुर्गा को फूल और अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। अगर संभव हो तो दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या मां के मंत्रों का जाप करें। अगर आप व्रत रखते हैं तो अपनी health और क्षमता के अनुसार ही व्रत रखें। केवल परंपरा निभाने के लिए शरीर को बहुत ज्यादा परेशान करना जरूरी नहीं है।
नवरात्रि 2026 का महत्व
नवरात्रि के नौ दिनों को भारतीय परंपरा में शक्ति की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। यही कारण है कि नवरात्रि के दौरान मंदिरों में विशेष पूजा होती है और घरों में भी लोग कलश स्थापना, अखंड ज्योत, मंत्र जाप और कन्या पूजन जैसे धार्मिक कार्य करते हैं।
Astrology और spiritual practices में भी नवरात्रि को साधना और सकारात्मक संकल्प के लिए अच्छा समय माना जाता है। हालांकि किसी भी पूजा या ज्योतिषीय उपाय को करते समय इसे guaranteed result के रूप में नहीं देखना चाहिए। श्रद्धा, कर्म और सही प्रयास हमेशा महत्वपूर्ण रहते हैं।
नवरात्रि 2026: सबसे जरूरी बात
अगर आपको सिर्फ यह जानना है कि “नवरात्रि कब से स्टार्ट हैं?”, तो याद रखें:
शारदीय नवरात्रि 2026 — 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू होगी। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:49 बजे शुरू होगी और 11 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:00 बजे समाप्त होगी। इसी वजह से 11 अक्टूबर को नवरात्रि का पहला दिन और मां शैलपुत्री की पूजा होगी।
अगर आप इस नवरात्रि में पूजा के साथ Rudraksha, crystal या astrology-based products का उपयोग करना चाहते हैं, तो अपनी राशि और आवश्यकता के अनुसार सही विकल्प चुनना ज्यादा समझदारी होगी, बजाय इसके कि केवल trend देखकर कोई भी product खरीद लिया जाए। नवरात्रि का असली उद्देश्य केवल पूजा की चीजें इकट्ठी करना नहीं, बल्कि अपने मन, विचार और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना है।
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